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सोने का वक्त हो जाने के बाद भी अगर आपको रात में नींद न आए तो अब सजग हो जाएं, यह दिमागी टेंशन का अलार्म है: ताराचंद

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राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कमला नेहरु काॅलेज में तनाव प्रबंधन पर स्पर्श क्लीनिक की कार्यशाला आयोजित

कोरबा। ऐसी कई बातें हैं, जिनका हम दैनिक जीवन में सामना करते हैं। कई पल अच्छे होते हैं पर कई हमारे मन को तकलीफ भी देते हैं। पर अच्छे-बुरे पल हम सब की जिंदगी का हिस्सा हैं। काम के दबाव के बीच इंसोमेनिया (यानि नींद न आना) और हाइपोमेनिया (ज्यादा नींद आना) जैसी समस्याएं हो सकती है। ऐसी स्थिति में आप तार्किक बनें। उदाहरण के लिए नींद आ रही हो तो ऐसा सोचें कि 5 मिनट और काम कर लेता हूं फिर सो जाऊंगा और फिर काम करने के धुन में नींद यूं ही भाग जाएगी। रात में सोने का वक्त हो गया है पर नींद न आना भी दिमागी तनाव का अलार्म है। बात-बात में गुस्सा आना दूसरा अलार्म है। अगर कंट्रोल न करें तो बीपी और अन्य बीमारियों की शुरुआत होती है।

यह बातें गुरुवार को कमला नेहरु महाविद्यालय में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत तनाव प्रबंधन पर आयोजित कार्यशाला में विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करते हुए के परामर्शदाता ताराचंद श्रीवास ने कहीं। प्राचार्य डाॅ प्रशांत बोपापुरकर के मार्गदर्शन में महाविद्यालय के सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में जिला स्वास्थ्य समिति (स्व. बिसाहूदास महंत स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय) कोरबा से आए विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों व कर्मियों को तनाव के कारणों, उसकी पहचान के लक्षणों और निवारण के उपायों पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों और प्राध्यापकों की जिज्ञासावश पूछे गए सवालों का जवाब देकर उनकी शंकाओं का समाधान भी किया। मेडिकल काॅलेज के विशेषज्ञों की टीम में शामिल काउंसलर ताराचंद श्रीवास, आंचल राठौर, तृप्ती, शारदा कंवर, अंजू व प्रभजोत ने भी मार्गदर्शन प्रदान किए। इस दौरान प्रमुख रुप से शिक्षा संकाय की विभागाध्यक्ष डाॅ भारती कुलदीप, श्रीमती अंजू खेस्स, अइयर क्लासेस के डायरेक्टर श्रीमती राजश्री अइयर, ज्योति पटेल, अक्षय प्रधान, रोहित सोनी उपस्थित रहे।


खुश रहना है तो गुस्से को दूर रखें और सरल-सहज व्यक्तित्व अपनाएं: डाॅ प्रशांत बोपापुरकर

प्राचार्य डाॅ प्रशांत बोपापुरकर ने कहा कि हम सभी को जाने-अनजाने कदम-कदम पर छोटे-बड़े तनाव से गुजरना ही पड़ता है। इससे बचने के लिए सबसे सरल उपाय यही है कि आप स्वयं सदैव सरल बने रहिए। हर स्थिति में आत्मनियंत्रित रहना, सामने वाला गुस्से में हो पर आपका पोलाइट रहना, ये स्ट्रेस से दूरी के लिए बड़ा अहम मूलमंत्र है। आप सभी ने महसूस किया होगा कि कुछ लोगों की सूरत सदैव मुस्कुराती मिलती है, ऐसे स्माइलिंग फेस को देखने पर हमारे मुख पर यूं ही मुस्कान खिल जाती है। खासकर तनाव जैसे शब्द से दूर रहने वाले छोटे बच्चों की मासूम मुस्कान देख काफी सुकून महसूस होता है। उन्हें बार बार देखने का मन करता है। दूसरी ओर कुछ चेहरे हमेशा नाराज और रूखे दिखते हैं और ऐसे चेहरों को देखने का भी मन नहीं करता। इसलिए सरल और सहज बनें, मुस्कुराते रहें और अपने जीवन से तनाव को दूर रखें।
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