Home छत्तीसगढ़ जिन 6 बेटियों ने देश की पहली महिला शिक्षक सावित्री बाई फुले...

जिन 6 बेटियों ने देश की पहली महिला शिक्षक सावित्री बाई फुले के स्कूल में पढ़ने का साहस किया, वे भारत में नारी शिक्षा की पहली मशाल हैं: डॉ केके सहारे

159
0

कसेकेरा/कोरबा। देश की पहली महिला शिक्षक सावित्री बाई फुले के जीवन और संघर्षों को स्मरण करते हुए छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा द्वारा विज्ञान आश्रम कसेकेरा में राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विज्ञान सभा के राज्य उपाध्यक्ष और कोरबा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ केके सहारे ने कहा कि जिन 6 बेटियों अन्नपूर्णा जोशी, सुमति मोकाशी, दुर्गा देशमुख, माधवी ठाकर, सोनू पवार और जनी करदले ने सावित्री बाई फुले के पहले स्कूल में पढ़ने का साहस किया, आज मैं सबसे पहले उन्हें याद करना चाहता हूं। ये केवल छात्राएं नहीं थी बल्कि भारत में नारी शिक्षा की पहली मशाल थी। शिक्षा महिलाओं को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाती है। 1948 में जब भारत के अधिकांश लोग अंध विश्वास, कूपमण्डूकता और अज्ञान के दलदल में डूबे हुए थे तब सावित्री बाई फुले का लड़कियों के लिए स्कूल खोलना, खुद प्रशिक्षण लेकर उन्हें पढ़ाना लिखाना एक क्रांतिकारी कदम था। ग्रामीण भारत में आज भी कई गांवों में लड़कियां गरीबी, बाल विवाह, घरेलू जिम्मेदारियां और पुरानी सोच के चलते अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने के लिए मजबूर हो जाती है। आज देश की जितनी भी पढ़ी लिखी डाक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, कलेक्टर, सैनिक अधिकारी तथा लेक्चरर प्रोफेसर महिलाएं हैं वे सभी सावित्री बाई फुले की ऋणी है। डीन डॉ केके सहारे विज्ञान आश्रम कसेकेरा में प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फुले की याद में आयोजित ” राष्ट्रीय शिक्षक दिवस” के अवसर पर बोल रहे थे। विज्ञान सभा के वरिष्ठ सदस्य और सरगुजा मेडिकल कालेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम ने तात्कालीन भारत में व्याप्त कुरीतियों के बारे में बताते हुए कहा कि यदि आज हम सब पढ़ लिख पाए हैं तो इसका श्रेय बाबासाहेब डॉ अंबेडकर के गुरु जोतीबा फुले और सावित्री बाई फुले को जाता है। विज्ञान सभा के वरिष्ठ पदाधिकारी और सीएसईबी के एडिशनल सीएमओ डॉ क्रांतिभूषण बंसोड़े ने बहुत विस्तार से सावित्री बाई फुले द्वारा प्रारंभ किए गए शिक्षा आंदोलन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के आगे बढ़ने की बुनियादी शर्त है। जोतीबा फुले और सावित्री बाई फुले ने इस सच्चाई को समझा और उन्होंने तात्कालीन समय में जातिवाद का दंश झेल रहे शूद्रों अर्थात आज के ओबीसी लोगों और दलितों के लिए न सिर्फ स्कूल खोला बल्कि अपने घर का कुआं भी उन्हें पानी भरने के लिए खुला कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनियां के सभी लोकतांत्रिक देश, अपने नागरिकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सहित सभी गुणवत्ता पूर्ण बुनियादी सुविधाएं निशुल्क मुहैय्या करा रहें हैं। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के इस कार्यक्रम में प्रदेश महिला सशक्तीकरण संघ छत्तीसगढ़ की कोषाध्यक्ष श्रीमती रंजना वालवांद्रे ने सावित्री बाई फुले के अध्यापन संबंधी अनुभवों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियौ से शोषित पिडी़त विघवा महिलाओं के बच्चो के पालन पोषण लिए बाल संप्रेक्षण गृह की स्थापना कर शिशुओं और विधवा महिलाओं को बचाने के लिए उनके संकल्प को बहुत महान कार्य बताया। उन्होंने कहा कि आज जब हम उनकी कविताओं को पढ़ते हैं तो उस समय सावित्री बाई फुले को दी जा रही प्रताड़ना को याद कर आंखों में आंसू आ जाते हैं। दुर्ग जिला चिकित्सालय के निषचेतना विभागाप्रमुख डॉ संजय वालवांद्रे ने सावित्रीबाई फुले की जयंती को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप मे मनाए जाने को बहुत महत्वपूर्ण कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओ की राष्ट के विकास में भागीदारी बढ़ेगी । उन्होंने शिक्षक दिवस के इस कार्यक्रम को बहुत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि हमारे महान विभूतियों के संघर्षों को समय समय पर याद किया जाना जरूरी है ताकि दुनियां उनके महान कार्यों को जान सकें। इस अवसर पर “कैंसर के बारे में जरूरी जानकारी ” जैसी ज्ञानवर्धक पुस्तिका लिखने, विज्ञान का प्रचार प्रसार करने और शिक्षा तथा स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए, इसी माह 31 जनवरी को सेवानिवृत हो रहे डॉ क्रांतिभूषण बंसोड़े को डॉ बाबासाहेब अंबेडकर का पोर्ट्रेट, शाल एवं औषधीय पौधे भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन पूर्व अपर कलेक्टर विश्वास मेश्राम द्वारा किया गया तथा आभार प्रदर्शन विज्ञान आश्रम कसेकेरा की संयोजिका उषा मेश्राम द्वारा किया गया।

संयुक्त सचिव छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त सचिव रतन गोंडाने ने कहा कि

9406318847

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here