कोरबा। पताढ़ी धाम में तीन दिवसीय परम पूज्य घासीदास जयंती समारोह आयोजित किया गया। 3, 4 व 5 फरवरी को हुए कार्यक्रम में अतिथि रहे डॉ. सलिक राम कोसले ने कहा कि समाज में बाबा जी के द्वारा कह गए सत्य वाक्य, मानव का आभूषण हैं। उन्होंने बताया कि कैसे अपने जीवन में आभूषण की तरह स्वीकार करना है व बाबा जी के द्वारा कहे गए वाणी मनखे मनखे एक बरोबर समता समानता और बंधुत्व के बारे में ग्राम वासियों को समझाया। डॉ कोसले ने सभी को बाबा गुरु घासीदास जयंती के शुभ अवसर पर शुभकामनाएं प्रदान की।
यह कार्यक्रम जय स्तंभ में पालो श्वेत ध्वज चढ़ा कर मनाया गया। मुख्य अतिथि लखन लाल लहरे अध्यक्ष श्री गुरु गद्दी एवं 100 गावा सतनाम विकास समिति पताढ़ी धाम रहे।
बाबा गुरु घासीदास जी के बताए संदेशों को लेकर डॉ कोसले ने कहा कि…
सत्य ही ईश्वर है: “सतनाम” पर विश्वास रखें, क्योंकि सत्य ही परमात्मा का असली नाम है।
समानता का संदेश: जाति-पाति और वर्ण भेद का त्याग करें। सभी मनुष्य एक समान हैं।
अहिंसा और करुणा: जीव हत्या न करें और मांसाहार का त्याग करें।
व्यसन मुक्ति: शराब, नशा, जुआ और चोरी जैसी बुराइयों से दूर रहें।
मूर्ति पूजा का निषेध: ईश्वर निराकार है, इसलिए मूर्ति पूजा के स्थान पर आत्मिक शुद्धता पर बल दें।
परस्त्री को माता समान मानना: समाज में नारी के प्रति सम्मान और परस्त्री गमन की वर्जना का पालन करें।
दोपहर में हल न चलाना: पशुओं के प्रति दया भाव रखते हुए दोपहर के समय उन्हें विश्राम दें
इस अवसर पर जय सतनाम जय सतनाम के की आवाज पुरी गांव मे गूंज उठी। पूरा ग्राम सतनाम मय हो गया। कार्यक्रम के अध्यक्षता जवाहरलाल डहरिया गुरु गद्दी पताढ़ी धाम के उपाध्यक्ष विशिष्ट अतिथि राजमंत्र जेपी कोशले, डॉ. सलिक राम कोसले नारायण लाल कुंर्रे अध्यक्ष सतनाम कल्याण समिति कोरबा संरक्षक श्री आत्माराम पन्ना श्री चंद्रिका प्रसाद डहरिया व सतनाम कल्याण समिति कर्रा नाला के अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद मीरी व समिति के सभी सदस्यों ने मंच में अतिथियों का फूल माला व श्री फलदेकर स्वागत किया, डीजे के साथ पूरा गांव भ्रमण करवाया पंथी नृत्य करते हुए आरती सजाकर प्रत्येक घर में चौका पूजा करते हुए घर में श्रीफल भेंट कर श्वेत ध्वज का पूजा किया गया इस अवसर पर कर्रा नाला सतनामी समाज कल्याण समिति के सभी पदाधिकारी व बच्चे ने पंथी अमृत का आनंद लिए इस समारोह के विशिष्ट अतिथि जेपी कोसले के द्वारा बाबा गुरु घासीदास के दिए हुए 7 उपदेश 42 अमृतवाणी को संक्षेप में बताया!