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जिन मूल्यों, परंपराओं को आज हम सनातन संस्कृति के रूप में पहचानते हैं, वे इस देश की आत्मा है, इसे बचाने एकता जरूरी : अमर अग्रवाल

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श्री बागेश्वर, श्री बांके बिहारी मिलन और सनातन हिंदू एकता पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का हुआ सम्मान, उत्सव में दिखा समर्पण और जागरूकता का संगम

बिलासपुर। श्री बागेश्वर, श्री बांके बिहारी मिलन और सनातन हिंदू एकता पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का सम्मान समारोह रविवार को संजीवनी अस्पताल के चाणक्य आडिटोरियम में उत्साह और आध्यात्मिक माहौल के बीच आयोजित किया गया। शहर और आसपास के पदयात्रियों को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि विधायक अमर अग्रवाल ने कहा कि बदलते समय में सनातन संस्कृति को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं। इसे बचाने के लिए आज सबसे ज्यादा जरूरत एकता की है।

     विधायक अमर अग्रवाल ने आगे कहा कि जिन मूल्यों और परंपराओं को आज हम सनातन संस्कृति के रूप में पहचानते हैं, वे सिर्फ धार्मिक आस्था भर नहीं बल्कि इस देश की आत्मा हैं। उन्होंने याद दिलाया कि दुनिया के कई धर्म और विचारधाराएं बाद में विकसित हुईं लेकिन उनका आधार कहीं न कहीं उसी ज्ञान, दर्शन और अनुशासन में है जिसे सनातन कहा गया। उन्होंने हनुमान चालीसा में सूर्य की दूरी के वर्णन का उदाहरण देते हुए कहा कि हजारों वर्ष पहले लिखी गई बातों को आज विज्ञान प्रमाणित कर रहा है।


ग्लोबल विलेज में चुनौतियां बढ़ीं

संबोधन में विधायक ने तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया ग्लोबल विलेज की ओर बढ़ रही है। तकनीक, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और जीवन शैली का दबाव संस्कृति पर असर डाल रहा है और इसी संक्रमणकाल में सनातन संस्कृति को बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने चेताया कि आने वाले 50 साल निर्णायक हैं। अगर समाज अभी एकजुट नहीं हुआ तो ऐसा संकट पैदा हो सकता है जो हजारों वर्षों में भी नहीं आया। उनके अनुसार सनातन हिंदुओं की एकता ही वह शक्ति है जो समाज को टिकाए रख सकती है और संस्कृति को नई पीढ़ियों तक पहुंचा सकती है।


श्री बागेश्वर धाम की पहल सराहनीय

अमर अग्रवाल ने बागेश्वर धाम के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ धार्मिक गतिविधियां नहीं बल्कि समाज में जागरूकता और संगठन की भावना को मजबूत करने वाले प्रयास हैं। बिलासपुर से 180 पदयात्रियों की सहभागिता को उन्होंने विशेष उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि लोग संस्कृति के लिए आगे आना चाहते हैं। उन्होंने आगामी आयोजनों के लिए भी पूर्ण सहयोग देने का भरोसा दिया।


धर्मग्रंथों का ज्ञान जरूरी: डा. विनोद तिवारी

समारोह में डा. विनोद तिवारी का संबोधन चेतावनी भरा और व्यवहारिक रहा। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति को कमजोर करने वाली कोशिशें पहले सीमित दायरे में थीं, लेकिन अब यह प्रवाह समाज के हर वर्ग तक पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि धर्मांतरण जैसी गतिविधियां अब सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर या कम पढ़े लिखे लोगों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के समझदार और सक्षम वर्गों को भी प्रभावित कर रही हैं। इस स्थिति में सतर्कता समय की मांग है। उन्होंने कहा कि धर्मग्रंथों का ज्ञान, परंपराओं की समझ और परिवार में सही संस्कार ही वह आधार हैं जो किसी भी समुदाय की पहचान को स्थिर रखते हैं। उन्होंने बागेश्वर धाम के सामाजिक कार्यों को जागरण का माध्यम बताया। कथा, कन्या विवाह और अन्य आयोजन लोगों को उनके मूल से जोड़ते हैं। उनके अनुसार संस्कृति केवल विश्वास नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है। डा. संजना तिवारी ने भी बिलासपुर के धर्मप्रेमियों की भूमिका की प्रशंसा की।


अप्रैल में आएंगे बागेश्वर सरकार

समारोह में अप्रैल में आयोजित होने वाली बागेश्वर सरकार की कथा की भी रूपरेखा साझा की गई। डा. विनोद तिवारी ने कहा कि इसके लिए 40 सदस्यीय आयोजन मंडल का गठन किया जाएगा। समिति पूरे कार्यक्रम की योजना, व्यवस्थाओं और समन्वय की जिम्मेदारी संभालेगी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी कथा तभी संभव है जब सभी संस्थाएं और श्रद्धालु एकजुट होकर आगे आएं।


महिलाओं की सहभागिता सराहनीय: महापौर पूजा विधानी

महापौर पूजा विधानी ने अपने संबोधन में महिलाओं की बढ़ती सहभागिता को समाज की सकारात्मक दिशा बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी सांस्कृतिक या धार्मिक आयोजन में महिलाओं की उपस्थिति उसकी आत्मा को मजबूत बनाती है। 180 पदयात्रियों में 76 महिलाओं की भागीदारी को उन्होंने गर्व का विषय बताया और संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह हर संभव सहयोग के लिए हमेशा तैयार हैं।


इनकी रही उपस्थिति

समारोह में अतिथियों का पारंपरिक विधि से स्वागत किया गया। कार्यक्रम में मुकेश हरिगोविंद नामदेव, कामेश उपाध्याय, संजय यादव, मुकेश शास्त्री, पं. शांतनु कृष्ण, कमलेश गुप्ता, सुशील श्रीवास्तव, शंकर कछवाहा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। महिला वर्ग से प्रतिमा श्रीवास्तव, कल्पना शांडिल्य, क्षिप्रा भौमिक, प्रतिमा पांडेय और भुवनेश्वरी साहू ने मेयर का स्वागत किया। कार्यक्रम में सौरभ दुबे, पल्लवी दुबे, बिंदु कछवाहा, सुजाता मानिक, शीला पटेल, ममता शर्मा, नीरा पांडेय, अरुणिमा तिवारी और अन्य श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

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