Home छत्तीसगढ़ Korba: इस घर में बसा है मानव और प्रकृति की दोस्ती से...

Korba: इस घर में बसा है मानव और प्रकृति की दोस्ती से सजा खूबसूरत आशियाना, कोने कोने में मिलेगी हरे भरे पौधों की सुकून से भरी ठंडक

232
0

विश्व पर्यावरण दिवस पर आज हम आपको निहारिका के एक ऐसे घर में ले चलते हैं जहां मानव और प्रकृति साथ साथ साथ रहते हैं। एक दूसरे का खयाल रखते हैं और एक दूसरे की देखभाल करते हैं। वाकई यह किसी मिसाल से कम नहीं। घर के एंट्रेंस की सीढ़ियां चढ़ते ही हरियाली से स्वागत होता है और फिर जहां जहां आपकी नजर ठहरे, इस बेचैनी से भरी गर्मी में भी हरे भरे पौधों की सुकून से भरी ठंडक मिलेगी।


निहारिका क्षेत्र में निवासरत श्रीमती कुलदीप कौर व मंजीत सिंह का पूरा घर हरियाली से भरा है। अपने इको हाउस को सहेजने के लिए दोनों वरिष्ठ जन पिछले दस से भी ज्यादा साल से मेहनत कर रहे हैं।
पर्यावरण की देखभाल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर युवाओं के लिए मिसाल बन रहे हैं। उन्होंने पिछले 10 सालों से अपने घर को ही ‘ऑक्सीजन का मिनी बैंक’ बना दिया है। इस दंपती के लिए पेड़-पौधे सिर्फ सजावट की वस्तु नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्य हैं, जिन्हें वे पिछले एक दशक से अपने बच्चों की तरह लाड़-प्यार से सहेज रहे हैं। आलम यह है कि इनके घर में कदम रखते ही आपको कंक्रीट के जंगल की तपिश भूलकर किसी शांत जंगल की छांव सा अहसास होगा। घर की छत (टेरेस) से लेकर बालकनी और कमरों के भीतर जहां भी नजर जाती है, वहां सिर्फ और सिर्फ पौधे ही मुस्कुराते नजर आते हैं।

250 प्रजाति के 1500 पौधों का कलेक्शन
निहारिका में नगर निगम जोन कार्यालय सामने स्थित सिंह दंपती के घर का कोई ऐसा कोना नहीं होगा जहां कोई पौधा न हो। टेरेस से लेकर बालकनी, गैलरी, डायनिंग हॉल ही नहीं घर के प्रवेश द्वार तक 250 प्रजाति के करीब 1500 से अधिक पौधों की श्रंृखला मौजूद है। जिनकी देखभाल रोज सुबह व शाम कुलदीप कौर करती हैं। उन्होंने बताया कि पौधों के बीच आने से जो सुकून व शांति मिलती है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि सभी पौधे वर्षों से हरियाली बिखेर रहे हैं।

पौधों की ये प्रजातियां है खास
कुलदीप कौर ने बताया कि वे जहां भी जाती हैं अगर वहां कोई अलग प्रजाति का पौधा दिख गया तो उसे अपने साथ ले आती हैं। बैंकाक, बेंगलुरू, ऊटी समेत छग के विभिन्न शहरों से लाए गए पौधे शामिल हैं। जिसमें एडेनियम, मॉन्स्टेरा, जेड प्लांट, गुलाब, बैम्बू प्लांट, एग्लोनिमा, पीस लिली, सकुलेंट, पाम, कैलाथिया ऑरबिफोलिया, एग्लोनिमा पिंक एलायंस, फिडल लीफ फिग, स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स, पॉनीटेल पाम, मनी प्लांट में गोल्डन पोथोस, मार्वल क्वीन पोथोस ए‌वं नियन पोथोस की प्रजाति खास है।

कोविड-19 में पौधों का शौक बना जीवन का आधार
पौधा प्रेमी कुलदीप कौर और मंजीत सिंह ने बताया कि 2011 से पहले जमशेदपुर में रहते थे। तब शौकिया पौधे पालते थे। कोरबा आने के बाद धीरे-धीरे पौधों की श्रंृखला बढ़ाते गए और 2016 तक बड़ी संख्या में पौधे जुटा लिए। इन पौधों का महत्व कोविड- 19 में तब और समझ में आया जब आक्सीजन की कमी के कारण लोग जीवन व मौत से जूझ रहे थे। तब ये पौधे उनके जीवन का आधार बने रहे। इतना ही नहीं इन पौधों की मौजूदगी से घर के अंदर का तापमान 2-3 डिग्री कम बना रहता है।

खूबियों वाला जेट प्लांट व एडेनियम भी है
रोटेरियन मंजीत सिंह ने बताया कि वैसे प्रत्येक पौधों की देखरेख करना बच्चों से भी जटित होता है। लेकिन एडेनियम (मरुस्थली गुलाब) की देखभाल करना काफी जटिल होता है। उनके यहां 7-8 साल पुराना एडेनियम है, जिसकी हर दो माह में कटिंग करनी पड़ती है। जड़ें तेजी से फैलती हैं। इसी तरह जेट प्लांट भी है। वास्तु में इसे बहुत शुभ माना गया है। इसे ‘मनी प्लांट’, ‘फ्रेंडशिप ट्री’ या ‘लकी प्लांट’ भी कहा जाता है। दंपती ने बताया कि इस पौधे से सकारात्मक ऊर्जा सदैव मिलती रहती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here