March 4, 2024

छह साल बाद एक बार फिर से चल रही ‘जेआरएफ NET’ के पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी

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इस परीक्षा में हर साल बड़ी संख्या में भाग लेते हैं सहायक प्राध्यापक बनने का लक्ष्य लेकर चल रहे युवा

कोरबा(theValleygraph.com)। अगर आप शोधार्थी हैं या कॉलेज-विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक बनने की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए खास खबर है। जूनियर रिसर्च फेलो (JRF) के लिए नेट परीक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी की जा रही है। साल में दो बार इस परीक्षा में शामिल होकर यह पात्रता हासिल करने बड़ी संख्या में युवा परीक्षा में बैठते हैं।

विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर बनने और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) के लिए राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नेट) के सिलेबस में छह साल के बाद बदलाव होने जा रहा है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत यूजीसी नेट परीक्षा के सभी 83 विषयों का नया सिलेबस तैयार कर लिया है। यूजीसी काउंसिल ने भी इसे मंजूरी दे दी है। अगले साल जून की नेट से इसे लागू किए जाने की संभावना है। यूजीसी के मुताबिक छह सालों के बाद इस परीक्षा के सिलेबस में बदलाव किया जा रहा है। यूजीसी काउंसिल की इसी माह के पहले सप्ताह को हुई बैठक में सिलेबस के बदलाव को स्वीकृति प्रदान की गई है। जल्द ही नए सिलेबस का ड्राफ्ट राज्यों और विश्वविद्यालयों के साथ साझा करने के साथ इसे यूजीसी वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। सभी हितधारकों से मिले सुझावों के आधार पर नेट का नया सिलेबस जारी किया जाएगा। इसके पहले करीब छह साल पहले यानी वर्ष 2017 में यूजीसी नेट के सिलेबस में बदलाव किया गया था। इसके बाद नई शिक्षा नीति लागू हुई और इसलिए एनईपी के तहत यूजीसी नेट का सभी 83 विषयों का नया सिलेबस तैयार किया गया है। विशेषज्ञों की समिति ने नए सिलेबस में बहुविषयक दृष्टिकोण और समग्र शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया है, जो निकट शिक्षा प्रणाली के भविष्य के लिए सार्थक साबित होगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है।

वर्ष में दो बार होती है यह अखिल भारतीय परीक्षा: डॉ प्रशांत बोपापुरकर

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) प्रत्येक वर्ष में दो बार नेट की यह परीक्षा आयोजित करता है। परीक्षा कराने की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) निभाती है और यह परीक्षा साल में दो बार जून और दिसंबर में होती है। कमला नेहरू कॉलेज के प्राचार्य डॉ प्रशांत बोपापुरकर ने बताया कि कंप्यूटर आधारित इस राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा में निगेटिव मार्किंग भी की जाती है, जिसमें हर साल बड़ी संख्या में अभ्यर्थी हिस्सा लेते हैं। खासकर उच्च शिक्षा में अध्यापन अथवा केंद्रीय स्कूल शिक्षण संस्थाओं में शिक्षकीय करियर के लिए तैयारी कर रहे युवा इस कसौटी पर खरा उतरने के प्रयास में नेट क्वालीफाई करने इसमें भागीदारी देते हैं।


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