कला की अनेक विधाओं में पारंगत शिक्षक घनश्याम को उनके नवाचार के लिए राष्ट्रीय शिक्षा रत्न सम्मान


रायपुर में हुए कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के उप संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर ने शिक्षक घनश्याम प्रसाद श्रीवास को किया पुरस्कृत।

कोरबा(theValleygraph.com)। अपने कौशल से बच्चों में शिक्षा के प्रति रूची जागृत कर योग्यता विकसित करना ही एक शिक्षक का कर्तव्य होता है। वर्तमान दौर कला और रोचक गतिविधियों से शिक्षा के मूल से जोड़ने का है। अपने इन्हीं नवाचारी गतिविधियों से विद्यालय के बच्चों के लिए शिक्षा के उत्कृष्ट प्रयास में जुटे ललित कलाओं में निपुण शिक्षक घनश्याम प्रसाद श्रीवास को राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षा रत्न का सम्मान दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार शिक्षा विभाग के उप संचालक व रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने राजधानी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया।

शिक्षक घनश्याम प्रसाद श्रीवास को राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षा रत्न अवार्ड का सम्मान 28 जनवरी को राजधानी रायपुर में आमंत्रित कर प्रदान किया गया। यह पुरस्कार भारत के सभी राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों से जुड़ा एक मात्र व देश का सबसे बड़ा स्वाप्रेरित नवाचारी शिक्षकों का सम्मान है। उन्हेंयह सम्मान जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान रायपुर में प्रदान किया गया। शिक्षक श्रीवास को उनके उनके नवाचार के लिए पुरस्कृत करते हुए उनके प्रयासों को प्रशस्ति प्रदान की गई है, ताकि उनसे प्रेरणा प्राप्त कर बच्चों की बेहतरी के लिए सभी शिक्षक प्रोत्साहित हो सकें। उन्हें यह सम्मान सचिवालय (शिक्षा )के उपसंचालक रायपुर व जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर की ओर से प्रदान किया गया। उनकी इस उपलब्धि पर जिले के शिक्षक साथियों में खुशी की लहर है। सर्व शिक्षक संघ के संरक्षक व प्रवक्ता का दायित्व निभा रहे घनश्याम श्रीवास को राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षा रत्न अवार्ड से सम्मानित होने पर संघ के पदाधिकारी व सदस्यों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहने की प्रार्थना की है।

नाट्यकला, लोक गायन व अभिनय में पारंगत हैं
अच्छी शिक्षा को प्रोत्साहित करते अपने नवाचारों के लिए पुरस्कृत शिक्षक घनश्याम प्रसाद श्रीवास न केवल अध्ययन कार्य में, बल्कि नाट्यकला, लोक गायन व अभिनय में भी उतने की पारंगत हैं। वे एक नवाचारी शिक्षक होने के साथ-साथ नाट्यनिर्देशक में भी उतने ही निपुण हैं। उनकी इन्हीं प्रतिभाओं के बूते विद्यालय बच्चों को चहुमुंखी विकास से जोड़ने में सहायता मिल रही है और यही वजह है जो उन्हें इस गरिमामय सम्मान से नवाजा गया है।
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