Changing the Narrative on Suicide
शासकीय ई.वी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोरबा में मनोविज्ञान विभाग, मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ एवं रेड क्रॉस सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. एल.एन. कंवर के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से संपन्न हुआ।
कोरबा। किसी व्यक्ति की खामोशी के पीछे छिपे दर्द को समझना और सही समय पर उसका हाथ थाम लेना, कभी-कभी उसके जीवन को एक नई दिशा दे सकता है। इसी संवेदनशील संदेश के साथ शासकीय ई.वी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोरबा में मनोविज्ञान विभाग, मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ एवं रेड क्रॉस सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. एल.एन. कंवर के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से संपन्न हुआ।
वर्ष 2026 की थीम “Changing the Narrative on Suicide” अर्थात “आत्महत्या के बारे में सोच और संवाद के तरीके में बदलाव” तथा संदेश “Start the Conversation” अर्थात “बातचीत शुरू करें” को केंद्र में रखते हुए विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील एवं जागरूक बनाया गया। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मानसिक परेशानी को कमजोरी समझने के बजाय उसे समझना, स्वीकार करना और उसके बारे में खुलकर बात करना आवश्यक है।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को आत्महत्या से जुड़े मिथकों, भ्रांतियों एवं सामाजिक कलंक से बाहर निकलने तथा संकट की स्थिति में व्यक्ति को अकेला छोड़ने के बजाय उसकी बात सुनने, उसे समझने और समय पर सहयोग प्रदान करने के लिए प्रेरित किया गया। यह संदेश दिया गया कि कई बार किसी व्यक्ति को समाधान से पहले केवल एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता होती है, जो उसकी बात बिना किसी निर्णय के सुन सके।
कार्यक्रम की एक विशेष पहल के रूप में मनोविज्ञान विभाग की ओर से महाविद्यालय के विभिन्न विभागों को मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम से संबंधित जागरुकता पोस्टर वितरित किए गए। इन पोस्टरों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, भावनात्मक संकट के संकेतों तथा समय पर सहायता लेने की आवश्यकता का संदेश महाविद्यालय के प्रत्येक विभाग एवं अधिकाधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अवंतिका कौशिल एवं अतिथि व्याख्याता डॉ. शैलेन्द्र कुमार गौतम के दिशा-निर्देशन में किया गया। मनोविज्ञान विभाग के MA III सेमेस्टर के आकाश यादव, लालनी गवेल एवं भावना बजाज ने ग्रुप का अच्छे से नेतृत्व किया जिसमें स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह, संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि आत्महत्या की रोकथाम केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि निरंतर संवेदनशीलता और संवाद की आवश्यकता है। परिवार, मित्र, शिक्षक और समाज यदि किसी व्यक्ति की परेशानी को समझने के लिए थोड़ा समय दें और बिना किसी पूर्वाग्रह के उसकी बात सुनें, तो कठिन परिस्थितियों में उम्मीद की एक नई किरण पैदा की जा सकती है।
उपलब्ध कराने वाली हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी भी दी गई। इस दौरान टेली-मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 तथा किरण मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर 1800-599-0019 के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि मानसिक तनाव, भावनात्मक संकट या अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की स्थिति में विशेषज्ञ सहायता प्राप्त की जा सकती है। सामूहिक सहभागिता, सहयोग एवं समन्वय से आयोजित यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संकल्प भी दिया कि वे स्वयं के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग और संवेदनशील रहेंगे। “एक बातचीत, एक संवेदनशील सुनवाई और एक समय पर दिया गया सहयोग किसी के जीवन में उम्मीद लौटा सकता है।” सामूहिक सहभागिता, सहयोग एवं समन्वय से आयोजित यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।






