एक्स सर्विसमैन पिता के नक्शेकदम पर बच्चे, बेटा देश के बर्फीले मस्तक का निगेहबां, रेगिस्तानी सरहद पर पहरा दे रही बेटी


गणतंत्र दिवस पर विशेष : CISF के रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर मोहम्मद अलाउद्दीन के बच्चों ने भी चुनी सैनिक की वर्दी, एक साथ ज्वाइनिंग, मोहम्मद किताबुद्दीन सीआईएसएफ के जवान तो बहन गुलाब्शा खातून बीएसएफ की जांबाज फौजी।


ऊंची तालीम लेकर विदेशी नौकरी का ख्वाब देखने वालों की कमी नहीं। पर ऐसे नौजवान कम ही मिलेंगे, जिनके रगों में देशप्रेम और बहादुरी का लहू समुंदर की लहरों की तरह दौड़ता है। हमारे शहर कोरबा में भी हजारों में एक ऐसा ही परिवार है, जिनके बच्चों को मुल्क-परस्ती का बेमोल सबक विरासत में मिला है। एक्स सर्विसमैन पिता का बेटा जहां सीआईएसएफ का जवान है और जम्मू के बर्फीले व संवेदनशील क्षेत्र में चौकसी कर रहा है, तो बेटी बीएसएफ की वर्दी पहनकर राजस्थान के रेगिस्तान में सरहद की हिफाजत कर रही है।

कोरबा(theValleygraph.com)। मोहन टॉकिज रोड जमनीपाली में रहने वाले रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर मोहम्मद अलाउद्दीन अपनी धर्मपत्नी श्रीमती आयशा खातून और पूरे परिवार के साथ निवास करते हैं। उन्होंने जीवनभर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की वर्दी में देश अनेक क्षेत्रों में सेवा प्रदान की। उनके सर्विस में रहते बच्चों ने भी अपने पिता की तरह सैनिक का गौरव हासिल करने का सपना देखना शुरू कर दिया। इसके लिए उन्होंने बचपन से कड़ी मेहनत भी की। अच्छी शिक्षा के साथ चुस्त-दुरुस्त बनने सूरज निकलने से पहले उठकर खूब दौड़ लगाई। आखिरकर उनकी मेहनत रंग लाई और उनके दो बच्चे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में कामयाब हुए। उनका बेटा मोहम्मद किताबुद्दीन और बेटी गुलाब्शा खातून, दोनों ने एक साथ सैनिक की वर्दी हासिल की।

पिछले साल किताबुद्दीन ने अपने पिता की तरह सीआईएसएफ ज्वाइन किया, गुलाब्शा ने साहस और शौर्य के लिए पहचाने जाने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में फौजी का रुत्बा हासिल किया। 7वीं रिजर्व बटालियन सीआईएसएफ के जवान के रूप में किताब कठिन ट्रेनिंग पूरी तरह पांच माह पहले अपनी पहली पोस्टिंग पर जम्मू के काफी संवेदनशील माने जाने वाले किस्तवार में तैनात हैं। उधर गुलाब्शा ने भी अपनी ट्रेनिंग खत्म करने के बाद 35वीं बटालियन बीएसएफ में राजस्थान के डाबला (जैसलमेर) राजस्थान में पोस्टिंग पाई है। एक ओर भाई देश का मस्तक कहे जाने वाले जम्मू के बर्फीले पहाड़ों की निगरानी पर है, तो दूसरी ओर उनकी जांबाज बहन देश के रेगिस्तानी सरहद में खड़ी दुश्मनों पर नजर रख रही है।

ब्लैक बेल्ट हैं किताब, गुलाब्शा भी ताइक्वांडो प्लेयर रहीं
किताबुद्दीन व उनकी बहन गुलाब्शा ने ग्रज्युएशन के बाद आगे के कॅरियर के लिए अपनी मंजिल पर ही फोकस किया। एक खास बात यह भी कि दोनों ही विद्यार्थी जीवन में ताइक्वांडो खिलाड़ी रहे हैं। किताबुद्दीन ब्लैक बेल्ट हैं और ताइक्वांडो की कई नेशनल स्पर्धाओं में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अनेक मेडल जीतकर न केवल कोरबा का मान बढ़ाया, अपने हुनर व अनुभव के जरिए बच्चों को ट्रेनिंग देकर स्टेट-नेशनल में पदक विजेता बन चुके कई खिलाड़ियों को तैयार किया। किताब ने बैचलर आॅफ फिजिकल एजुकेशन किया है। उन्होंने कहा कि मंजिल साफ हो, तो रास्ते की कठिनाइयां मायने नहीं रखतीं, बस आपको कदम आगे बढ़ाते रहना होगा।

छोटी बेटी गुलशन भी कर रही फौजी बनने की तैयारी, पिता ने कहा- उन्हें फक्र है
किताब व उनकी बहन गुलाब्शा ने तो अपनी मंजिलें पा ली, पर अपने परिवार की परंपरा के अनुरूप अभी ये सिलसिला यहीं थमा नहीं है। उनकी छोटी बहन गुलशन खातून भी तैयार हो रही है। गुलशन ने भी अपने लिए सैन्य सेवा का लक्ष्य बनाया है और वह भी कड़ी मेहनत कर रही हैं। देश और वर्दी के लिए बच्चों के जज्बे को लेकर पिता मोहम्मद अलाउद्दीन कहते हैं कि जिस दिन उन्होंने अपने बच्चों के मन की बात जान ली, उसी दिन उन्होंने खुद को जीवन में सफल मान लिया था। आज के दौर में देश को ऐसे ही नौजवानों की जरूरत है, जो देश के लिए जीने और कुछ कर गुजरने का जज्बा रखते हों। उन्हें उन पर नाज है। सचमुच, किताब और गुलाब्शा देश के युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं।


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