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30 जून को खत्म होगी कोयला मजदूरों के 11वें वेतन समझौते की मियाद, पर JBCCI कमेटी का गठन करने कोल इंडिया ने अब तक नहीं मंगाई श्रम संगठनों से प्रतिनिधित्व के लिए सूची

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कोल इंडिया को कोयला मजदूरों का 12वां वेतनमान के लिए जेबीसीसीआई कमेटी का गठन 30 जून से पहले कर लेना चाहिए अन्यथा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) कोल इंडिया को डिफॉल्ट घोषित कर सकती है

कोरबा। कोयला मजदूरों का 11वां वेतन समझौते का मियाद 30 जून को खत्म होने जा रहा है और वहीं 12वां वेतन मान 1 जुलाई से लागू होना है परंतु अभी भी कोल इंडिया ने 12वां वेतन समझौता को संपन्न कराने के लिए जेबीसीसीआई कमेटी गठन करने के लिए श्रम संगठनों से प्रतिनिधित्व के लिए सूची नहीं मंगाई गई है। नियमानुसार हर हाल में कोल इंडिया को कोयला मजदूरों का 12वां वेतनमान के लिए जेबीसीसीआई कमेटी का गठन 30 जून से पहले कर लेना चाहिए अन्यथा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) कोल इंडिया को डिफॉल्ट घोषित कर सकती है। इस संबंध में इंडियन माइंस वर्कर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपेश मिश्रा ने बताया कि कोल इंडिया ने अपना पहला आईपीओ ( आरंभिक सार्वजनिक निर्गम ) में अपनी कुल चुकता पूंजी ( Equity ) का दस फीसदी हिस्सा बेचा था। यह आईपीओ 2010 मे आया था जिसके जरिए भारत सरकार ने 63,16,36,440 शेयर बेचकर 15200 करोड़ जुटाए थे और और इसके साथ ही 4 नवंबर 2010 को कोल इंडिया भारतीय शेयर बाजार ( नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एवं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ) मे सूचीबद्ध हुआ, उन्होंने आगे बताया कि भारतीय शेयर बाजार में कोल इंडिया पिछले 15 वर्षों से एक मजबूत ब्रांड बना हुआ है और इसी तरह सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ) भारत में शेयर बाजार और कमोडिटी बाजार को नियंत्रित ( रेगुलेट ) करने वाली सर्वोच्च संस्था है इस क्रम में जब कोई सूचीबद्ध कंपनी शेयर बाजार में अपनी देनदारियों (Liabilities) या कर्ज तय समय पर चुकाने में विफल रहती है तो उस कंपनी को डिफॉल्ट माना जा सकता है यानी कि सेबी द्वारा किसी भी सूचीबद्ध कंपनी को डिफॉल्ट घोषित होने पर कठोर कार्रवाई होती है जैसे कंपनी की ट्रेडिंग को ” Z ” श्रेणी मे डाल देना ( मतलब उस कंपनी के शेयर को जोखिम भरा मानना)या निलंबन करना व प्रमोटरों के शेयर को फ्रिज करना तथा भारी आर्थिक जुर्माना और अंततः उस कंपनी को अनिवार्य रूप से डीलिस्टिंग की प्रक्रिया भी की जा सकती है इस संबंध मे दीपेश मिश्रा ने अंत में कहा कि कोल इंडिया जो कि एक प्रतिष्ठित कंपनी है उसको अपनी साख बचाने के लिए हर हाल में 30 जून से पहले जेबीसीसीआई कमेटी का गठन कर लेना चाहिए ताकि कोयला मजदूरों का 12 वेतन समझौता जल्द से जल्द संपन्न हो और कोल इंडिया भी अपने लायबिलिटीस से मुक्त हो सके।

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