बजट से कारोबार और उपभोक्ताओं को उम्मीद…कर और शुल्क घटे तो बढ़ जाए गहने-गाड़ियों की चमक


ज्वेलरी और आटोमोबाइल सेक्टर की उम्मीद, कारोबारियों ने कहा- उपभोक्ता वर्ग को मिलेगी राहत, कारोबार में आएगा उछाल।

केंद्र सरकार एक फरवरी को अनुपूरक बजट पेश करेगी। बजट में कारोबार की अपेक्षाएं क्या हैं, इसे लेकर धड़कनें तेज हैं। बजट में कारोबार की उम्मीदों को तवज्जो दिया जाता है, तो न केवल बाजार में उछाल आएगा, आम उपभोक्ताओं में भी खरीदारी को लेकर उत्साह दिखाई देगा। उपभोक्ताओं को खासकर वाहनों और गहनों के बाजार की चमक सबसे ज्यादा आकर्षित करती है। इन दोनों सेक्टर को लेकर कारोबारियों ने अपनी मंशा व्यक्त कर दी है। उनका कहना है कि टैक्स व शुल्क में रियायत से कारोबार में उछाल आएगा और उपभोक्ताओं के लिए भी राहत दर्ज की जा सकेगी।

कोरबा(theValleygraph.com)। जानकारों की मानें तो आम तौर पर चुनाव के पहले आने वाले बजट का टारगेट आय के लेवल में वृद्धि कर उपभोग को बढ़ावा देना होता है। संभवत: बुनियादी ढांचे के खर्च में वृद्धि और ग्रामीण विकास के लिए अधिक धन के माध्यम से अब उपभोक्ता की खर्च के योग्य आय को बढ़ावा देने के उपायों की उम्मीद की जा रही है। कारोबार की दृष्टि से गहनों और वाहनों के बाजार में उपभोक्ताओं की सबसे ज्यादा भीड़ होती है, जिन्हें फोकस कर जिले के सर्राफा और आॅटोमोबाइल कारोबारियों से चर्चा की गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को केंद्रीय बजट 2024-25 पेश करने वाली हैं। अंतरिम बजट से पहले उपभोक्ता वर्ग के सबसे पसंदीदा सर्राफा और आॅटोमोबाइल बाजार में भी हलचल महसूस की जा सकती है। कोरबा के बाजार से हम यह जानने का प्रयास करते हैं, कि इन दोनों सेक्टर को बजट से क्या अपेक्षाएं है। उन उम्मीदों की तलाश करते हैं, जिन्हें अंतरिम बजट को लेकर संजोई गई है। कारोबार की अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाले उस बजट की परिकल्पना बनाते हैं, जो उपभोक्ता व बाजार की दोस्ती को और भी मजबूत बनाने में मददगार साबित होगा।

आयात शुल्क को घटाकर 4 प्रतिशत करने की मांग : जय सोनी
न्यू जेके ज्वेलर्स के संचालक जय सोनी ने बताया कि रत्न व आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने सरकार से सोने और कटे व पॉलिश हीरे (सीपीडी) पर आयात शुल्क कम करने का आग्रह किया है, ताकि लोगों के लिए सोना-चांदी की खरीदी राहतभरा हो। क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिल सके। कीमती धातुओं पर आयात शुल्क को मौजूदा 15 प्रतिशत से घटाकर चार प्रतिशत करने की मांग की जा रही है। इसमें सीपीडी पर सीमा शुल्क को मौजूदा पांच प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत करने की मांग की गई है। इसके अलावा सरकार से डायमंड इंप्रेस्ट लाइसेंस को फिर से शुरू करने और आयात शुल्क में कटौती करने का आग्रह किया गया है। इससे भारतीय सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों से जुड़े निर्यातकों को उनके बड़े समकक्षों के साथ समान अवसर मिल सकेगा। कारखानों में हीरे के वर्गीकरण और बिना तराशे हीरे की प्रोसेसिंग के मामले में अधिक रोजगार सृजन करने में भी मदद मिलेगी।

सोने चांदी के भाव में जुड़े कस्टम ड्यूटी को कम करें: जगदीश सोनी 

पद्मिनी ज्वेलर्स के संचालक व कोरबा सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश सोनी का कहना है कि सोने के भाव में भारी-भरकम कस्टम ड्यूटी के चलते उपभोक्ता के लिए महंगा पड़ जाता है। वर्तमान में सोने पर कस्टम ड्यूटी 12.50 प्रतिशत है, जो भाव में ही जुड़ा हुआ है। उदाहरण के लिए कोई व्यवसाय के लिए अगर एक करोड़ का सोना खरीदता है, तो उसे साढ़े 12 लाख रुपये अतिरिक्त पड़ता है और यह अंतर काफी बड़ी राशि होती है। उसके बाद तीन प्रतिशत जीएसटी भी अलग से जोड़ी जाती है, जिससे सीधे-सीधे साढ़े 15 प्रतिशत हो जाता है। यही वजह है जो कई ग्राहक विदेशों से सोना लेना पसंद करते हैं, जो उनके लिए सस्ता पड़ता है। ऐसे में आम उपभोक्ता और कारोबार, दोनों के लिए ही कस्टम ड्यूटी कम किया जाना चाहिए, जो ग्राहकों को महंगाई से बड़ी राहत तो प्रदान करेगी ही, दूसरी ओर तस्करी पर भी अंकुश लगेगा।


आवश्यक वस्तुओं के मूल्य में संतुलन बिठाना जरूरी : मुकेश जैन
आगामी केंद्र के बजट को लेकर श्री नाकोडा ज्वेलर्स के संचालक मुकेश जैन ने कहा कि केंद्रीय स्तर पर जीजेईपीसी ने कीमती धातुओं पर आयात शुल्क को मौजूदा 15 प्रतिशत से घटाकर चार प्रतिशत करने की मांग रखी है। केंद्र सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर में अच्छे से काम हो रहे हैं, पर उसी गति से काम बढ़ने चाहिए। वे चीजें, जो आम आदमी को प्रभावित करतीं हैं, उनका स्तर सामान्य हो। निर्धन वर्ग के लिए अनेक सुविधाएं-योजनाएं संचालित हैं, पर लोवर मिडिल क्लास व अपर मिडिल क्लास की मुश्किलों को देखते हुए मूल्य नियंत्रण होना ही चाहिए। जीवन से जुड़ी वस्तुओं, जैसे दाल-राशन, नमक-शक्कर व खाद्य तेल, इनकी कीमतों में राहत की सख्त जरूरत है, यही अपेक्षा केंद्र सरकार के बजट से होगी। वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि के मुकाबले लोगों की आय में कम है। ऐसे में आवश्यक वस्तुओं के मूल्य में संतुलन बिठाना जरूरी है, ताकि जिंदगी आसान हो सके।
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जीएसटी में मिले कम से कम दस प्रतिशत की छूट : राजा मोदी
तिरुपति बजाज आटो के संचालक राजा मोदी ने कहा कि हमेशा से यही मांग प्रमुख रही है कि कर में रियायत मिले। दूसरी वस्तुओं के मुकाबले आॅटो मोबाइल सेक्टर में जीएसटी अभी बहुत ज्यादा है।

श्री मोदी ने कहा कि गाड़ियों की कीमत कोविड के बाद डेढ़ गुना बढ़ गई है। यानि जो गाड़ी पहले छह लाख में मिलती थी, अब नौ लाख में बिक रही है। इसका कारण यही है कि टैक्स बहुत ज्यादा हैं। दूसरी ओर रॉ मटेरियल भी पहले की अपेक्षा महंगे हो गए हैं। हम तो यही चाह रहे हैं सरकार अगर जीएसटी में कम से कम दस प्रतिशत की छूट प्रदान करे, ताकि गाड़ियों की कीमतें भी कम हों और आम लोगों को भी राहत मिले। टैक्स में छूट मिलने से मिडिल क्लास के लिए भी अपने स्वयं के वाहन खरीदने का सपना पूरा करने की राह सरल बन सकेगी, जो वर्तमान में थोड़ा कठिन हैै।


वन नेशन वन टैक्स की परिकल्पना साकार करे सरकार: ओपी अग्रवाल

महिंद्रा आॅटो सेंटर के संचालक ओपी अग्रवाल का कहना है कि अभी आॅटोमोबाइल सेक्टर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए सरकार से प्रोत्साहन की अपेक्षा है। इंडस्ट्री को प्रमोट करने के लिए कुछ अच्छी स्कीम लाई जाए, तो मार्केट और ज्यादा बूम कर सकता है। हमारे यहां आॅटोमोबाइल सेक्टर में काफी अच्छी संभावनाएं हैं। जरूरत भी है और कंपनियों के पास प्रोडक्ट भी काफी अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि एक जरूरी बात पर फोकस करना लाजमी होगा कि केंद्र सरकार को वन नेशन वन टैक्स का कांसेप्ट लागू कर देना चाहिए। वर्तमान में आरटीओ के रजिस्ट्रेशन का जो टैक्स है, वह हर राज्य में अलग-अलग है। इसे वन नेशन वन टैक्स में लाते हुए एक समान कर दिया जाए, तो आॅटोमोबाइल सेक्टर की बेहतरी के लिए बहुत अच्छा होगा।


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