April 25, 2024

हादसे में चल बसे राहगीर के मजबूर परिवार को मिला न्याय, पति-पत्नी के बीच चल रही अनबन का पल में समाधान

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प्रथम हाइब्रिड नेशनल लोक अदालत, “न्याय सबके लिए के साथ” की थीम लेकर एक ही दिन में किया गया 4314 प्रकरणों का निराकरण।

कोरबा(theValleygraph.com)। शनिवार को वर्ष 2024 के प्रथम हाइब्रिड नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान एक ही दिन में 4314 प्रकरणों का निराकरण किया गया। एक मामला ऐसा भी पेश हुआ, जिसमें दो साल पहले सड़क हादसे में चल बसे राहगीर के परिवार को न्याय के साथ चौबीस लाख की क्षतिपूर्ति भी स्वीकृत कराई गई। इस तरह एकलौते कमाऊ मुखिया के जाने के बाद बेसहारा होकर आर्थिक मुश्किलों से गुजर रही पत्नी व नाबालिग बच्चे के जीवन को बड़ा सहारा मिल सकेगा। इसी तरह के कई ऐसे प्रकरण आए, जिनका निराकरण कर लोगों को राहत की महत्वपूर्ण जुगत की जा सकी।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) व छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा द्वारा जिला व तहसील स्तर पर सभी मामलों से संबंधित नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला व सत्र न्यायाधीश व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा सत्येंद्र कुमार साहू के मुख्य आतिथ्य, विशिष्ठ अतिथि अपर सत्र न्यायाधीश सुश्री संघपुष्पा भतपहरी, तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार चतुर्वेदी, अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) कोरबा श्रीमति ज्योति अग्रवाल, द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कृष्ण कुमार सूर्यवंशी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोरबा सीमा चंद्रा, तृतीय व्यवहार न्यायाधीश, बृजेश राय, प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वर्ग एक कोरबा के अतिरिक्त व्यवहार न्यायाधीश, श्रीमती प्रतिक्षा अग्रवाल, व्यवहार न्यायाधीश वर्ग दो श्रीमती रिचा यादव, संजय जायसवाल, अध्यक्ष, जिला अधिवक्ता संघ, कोरबा, नूतन सिंह ठाकुर, सचिव, जिला अधिवक्ता संघ कोरबा, बीके शुक्ला, सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद बिलासपुर, मानसिंह यादव, चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल सिस्टम कोरबा दीप प्रज्जवलन कार्यक्रम में उपस्थित थे। लोक अदालत में पेश हुआ यह मामला 17 जनवरी 2022 को हुई घटना पर केंद्रित था। आवेदिका के पति फूलचंद देवांगन अपने वाहन से बालको जाने निकाला था। शाम के करीब 6 बजे परसाभांठा के पास मुख्य मार्ग में युवक ट्रेलर की ठोकर से घायल हो गया। इलाज के दौरान मौत हो गई। आवेदिका का पति घर का एकलौता कमाने वाला था। जिसकी मृत्यु के बाद आवेदिका व उसके नाबालिग बच्चे व उनकी बेसहारा हो गए। उन्होंने बीमा कंपनी के विरुद्ध क्षति की रकम प्राप्त करने मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा 166 के अंतर्गत न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया था। मोटर यान दुर्घटना दावा अधिकरण कोरबा पीठासीन न्यायाधीश श्रीमती ज्योति अग्रवाल के समक्ष पेश प्रकरण में आवेदकगण व अनावेदक (बीमा कंपनी) ने हाइब्रिड नेशनल लोक अदालत में संयुक्त रूप से समझौता कर आवेदन पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें हाइब्रिड नेशनल लोक अदालत का लाभ लेते हुए आवेदकगणों ने 24 लाख रुपए बिना किसी डर-दबाव के राजीनामा किया। उसे शनिवार से 30 दिवस के भीतर अदा किए जाने का निर्देश दिया गया।

कुल 10782 प्रकरण रखे गए
नालसा थीम सांग न्याय सबके लिए के साथ नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया गया। जिसमें न्यायालय में कुल 10782 प्रकरण रखे गए थे। न्यायालयों में लंबित प्रकरण 3117 व प्री-लिटिगेशन के 7665 प्रकरण थे। जिसमें राजस्व मामलों के प्रकरण, प्री-लिटिगेशन प्रकरण तथा न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के कुल प्रकरणों सहित 4314 प्रकरणों का निराकरण नेशनल लोक अदालत में समझौते के आधार पर हुआ।

कुटुम्ब निर्माण में अहम योगदान, पति-पत्नी के अर्से से चल रहे विवाद का भी त्वरित समाधान
कुटुम्ब न्यायालय कोरबा के पीठासीन न्यायाधीश ओमकार प्रसाद गुप्ता के समक्ष पति-पत्नी विवाद का एक केस सामने आया। आवेदक व अनावेदक का 12 वर्ष पूर्व हिन्दू रिति-रिवाज से विवाह हुआ था। दंपति को विवाह से एक पुत्र है। दहेज में मोटर सायकल नहीं मिला, कहकर हर रोज प्रताड़ित करने लगे। इस बात पर ताना मारना, मारपीट करना व कई बार घर से बाहर निकालने की घटना हुई। अनावेदक आए दिन शराब के नशे में गाली-गलौच कर शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताडित करने लगा। विवाद इतना बढ़ गया कि अनावेदक के द्वारा आवेदिका को अन्य ग्राम में जबरन छोड़ कर चला आया व भरण-पोषण की व्यवस्था करना बंद कर दिया। तंग आकर आवेदिका ने न्यायालय के समक्ष भरण पोषण राशि दिलाए जाने आवेदन दिया। शनिवार को प्रकरण हाइब्रिड नेशनल लोक अदालत में आया। खंडपीठ ने आवेदक को समझाइश दी। जिसके फलस्वरूप अनावेदक अपनी आवेदिका पत्नी व नाबालिग पुत्र को साथ रखे तथा एक खुशहाल वैवाहिक जीवन व्यतीत करे। पति-पत्नी ने सलाह स्वीकार कर अपने व अपने कुटुम्ब के भविष्य हेतु राजीनामा के आधार पर सुखपूर्वक व खुशहाल जीवन यापन करने बिना डर व दबाव के समझौता किया।
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