May 24, 2024

हाईस्कूल की स्मार्टक्लास में विश्वविजयी भारत की स्मार्ट लैंडिंग, चंद्रयान-3 की सफलता इस नए कीर्तिमान के साक्षी बने स्टूडेंट

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हाईस्कूल स्याहीमुड़ी में मिशन चंद्रयान-3 के फाइनल स्टेज का लाइव प्रसारण, चंद्रमा की जमीन पर लैंड करते देख सभी हुए उत्साहित, चांद पर पहुंचे विक्रम की विश्व विजय से झूमे शहरवासी। विद्यालय प्राचार्य डॉ फरहाना अली ने बताया कि यह देश के लोगों के लिए गर्व का क्षण है.

कोरबा(thevalleygraph.com)। चांद की जमीन पर चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग होते ही भारत ने एक नया रचते हुए 24 अगस्त के इस दिन को हमेशा के लिए अमर कर दिया है। इस खास मौके का उत्सव पूरे देश के साथ कोरबासियों ने भी मनाया। अनेक स्कूलों में मिशन चंद्रयान-3 के फाइनल स्टेज का लाइव प्रसारण बच्चों को दिखाने की व्यवस्था कर रखी थी। इसके अलावा घर-घर लोग लगातार टीवी के सम्मुख पल-पल पर नजर बनाए हुए थे। यह अद्भुद विजयी नजारा देख छात्र-छात्राएं खासे उत्साहित हुए। चांद पर लैंड करते ही भारतीय लैंडर विक्रम की विश्व विजय के साथ ही शहरवासी झूमने लगे और एक-दूसरे को संदेश भेजकर खुशियां साझा की।

चंद्रयान-3 आंध्र प्रदेश के हरिकोटा के स्पेस सेंटर से 14 जुलाई को दोपहर 2.35 बजे लॉन्च किया गया था। बुधवार को, यानि वर्ष 2023 में 24 अगस्त की यह तारीख भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मिशन चंद्रयान-3 सफल हो गया है। चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान 3 के विक्रम लैंडर की सफल लैंडिंग हो गई है। चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग के साथ भारत चंद्रमा पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। इसी कड़ी में इस खास घड़ी को हमेशा के लिए अपने जेहन में कैद करने शासकीय हाई स्कूल स्याहीमुड़ी में भी लाइव प्रसारण रखा गया। स्कूल की प्राचार्य डॉ फरहाना अली ने बताया कि चन्द्रयान 3 की लैंडिंग का लाइव प्रसारण 23 अगस्त को शाम 5.27 से शुरू हो गया। चंद्रयान 3 ने बुधवार की शाम 6.04 बजे के करीब चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर एक नर्म भूमि पर लैंड किया। अभी इसमें जब कुछ पल बाकी थे और लैंडर विक्रम सफल लैंडिंग करने के लिए पूरी तरह तैयार था, तब कुछ देर के लिए कार्यक्रम स्थल पर मानों सन्नाटा सा छा गया। जैसे ही वल पल पूर्ण हुआ, कोरबा, स्कूल के बच्चे और शिक्षकों समेत सभी देशवासी झूमने लगे। उन्होंने बताया कि उत्सुकता के साथ इस चंद्रयान-3 की लैंडिंग को देखने का यह स्वर्णिम आनंद अद्वितीय है। शासकीय हाई स्कूल से स्याहीमुड़ी में चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग को स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को शाम 6 बजे दिखाया गया।

तीन उद्देश्य, सॉफ्ट लैंडिंग, वन लूनर डे और वैज्ञानिक परीक्षण : डॉ फरहाना अली 
विद्यालय प्राचार्य डॉ फरहाना अली ने बताया कि यह देश के लोगों के लिए गर्व का क्षण है, जब चंद्रयान-3 की लैंडिंग चंद्रमा पर सफलतापूर्वक पूरी की गई। चंद्रयान-3 के लैंडिंग के तीन उद्देश्य हैं, पहले विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग 26 किलोग्राम 57 पाउंड वजन वाले रोवर को चांद की सतह पर एक दिन वन लूनर डे यानी धरती के 14 दिन के बराबर चलाकर दिखाना। दूसरा उद्देश्य रोवर को चंद्रमा पर भ्रमण कर प्रदर्शन करना और तीसरा उद्देश्य चंद्रमा पर वैज्ञानिक परीक्षण करना है। इन उद्देश्यों की पूूरा कर भारत अब न केवल विज्ञान के एक नए युग में कदम रख चुका है, उसके कदमों पर सारा विश्व पीछे चलने को तैयार होगा।

सुरक्षित लैंडिंग और रोविंग की एंड टू एंड क्षमता :- प्रभा साव
प्रभा साव ने बताया कि चंद्रयान-3 की लैंडिंग ऐतिहासिक क्षण हैं। चंद्रयान 3, चंद्रयान-2 का अनुवर्ती मिशन है, जो चंद्र सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और रोविंग की एन्ड टू एन्ड क्षमता को प्रदर्शित करता है। पुष्पा बघेल ने बताया कि लगभग 700 करोड़ रुपए के मिशन को पूरा करने और चलाने के लिए लगभग एक हजार इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने काम किया। चंद्रयान-3 में चार तरफ सौर पैनल है। लैंडर चंद्रयान में दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग किया और अब इसके साथ ही भारत ऐसा करने वाला विश्वक का एकमात्र देश बन गया है। चंद्रयान-3 की लैंडिंग को देखने के लिए सभी बच्चों में अत्यधिक उत्सुकता रही।कार्यक्रम के दौरान प्रभा गुप्ता, सरोजिनी उईके, तनु प्रिया देवांगन, सभी व्याख्याता गण उपस्थित थे।

भारत के नेतृत्व में दुनिया के लिए नए युग का सूत्रपात :- डॉ आरसी पांडेय
इस संबंध में चिकित्सक डॉ आरसी पांडेय ने बताया कि भारत की इस ऐतिहासिक वैश्विक उपलब्धि ने एक नया इतिहास रच दिया है। चांद पर लैंडर विक्रम की सफल सॉफ्ट लैंडिंग न केवल भारत के लिए एक नए युग में प्रवेश का सूत्रपात है, सारे विश्व के लिए एक नए नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाने की ओर हमारे देश का एक प्रभावी कदम भी माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में चांद पर पड़े भारत के इस कदम का अनुसरण अब सारा विश्व करेगा। भारतीय वैज्ञानिकों की अनवरत कोशिशों का यह सुखद नतीजा अद्वितीय, अद्भुत और अविस्मरणीय है।


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