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16 जून से खुलेंगे स्कूल पर निजी स्कूलों को अब तक नहीं मिली किताबें, वक्त पर वितरण में पाठ्य पुस्तक निगम फिर फेल : जिलाध्यक्ष अक्षय दुबे

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छग राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के कोरबा जिलाध्यक्ष अक्षय कुमार दुबे ने बताया की जिला स्तर पर भी बार-बार पूछने पर किसी प्रकार की सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ शासन से मांग करता है कि पुस्तक वितरण करने की व्यवस्था में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम अपने अंतरिक कलह एवं भ्रष्टाचार के चलते लगातार फेल हो रहा है ऐसे में उससे वितरण व्यवस्था की जिम्मेदारी वापस लेकर शिक्षा विभाग को सौंप दी जानी चाहिए तथा जिला शिक्षा अधिकारी/ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से पुस्तकें वितरण करवाई जाए। या फिर एनसीईआरटी ने जिस प्रकार की वितरण व्यवस्था बनवाई है की खुले बाजार में पुस्तकें रखी जाती है और अत्यंत कम शुल्क में बच्चों को उपलब्ध हो जाती है वैसे ही छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की सभी पुस्तक भी खुले बाजार में दे दी जाए। जिससे पालक उसे स्वयं खरीद सके।सरकार चाहे तो DBT के माध्यम से पुस्तकों की राशि सीधे बच्चों के खाते में ट्रांसफर कर दे।


छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग से संबंधित सभी स्कूलों में विद्यार्थियों को कक्षा पहली से दसवीं तक निशुल्क पुस्तक प्रदान की जाती है।

जब से निशुल्क पाठ्य पुस्तक का वितरण किया जा रहा है। तब से हमेशा छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के द्वारा शासकीय स्कूलों को कक्षा 1 से 8 तक पुस्तक संकुल स्तर पर प्रदान की जाती है। एवं 9 से 12 तक स्कूल स्तर पर प्रदान की जाती है।
एवं निजी विद्यालय को जिला मुख्यालय में निशुल्क पुस्तक कक्षा 1 से 10 तक प्रदान की जाती रही है। अनेक वर्षों से इस व्यवस्था से समुचित रूप से कार्य चलता रहा।

परंतु विगत वर्ष 2025 26 से शासकीय स्कूलों के लिए व्यवस्था तो पूर्ववत रही। परंतु छत्तीसगढ़ के संपूर्ण निजी विद्यालयों को पहली बार छत्तीसगढ़ के 6 डिपो से पुस्तक प्रदाय करने के लिए बुलाया गया।

शासकीय विद्यालयों को तो पुस्तक संकुल स्तर पर 15 जून 2025 तक प्रदान कर दी गई परंतु निजी विद्यालय को डिपो में डेट पर डेट देकर सितंबर 2025 तक पुस्तक प्रदान की गई । निजी विद्यालय को इस व्यवस्था पर समय की बर्बादी के साथ अत्यधिक आर्थिक नुकसान भी हआ। निजी विद्यालय को पुस्तकों की प्राप्ति के लिए डिपो में दो से तीन बार जाना पड़ा ।जबकि कक्षा पांचवी की हिंदी सहित अन्य कक्षाओं के भी एक दो टाइटल सत्र की समाप्ति तक शासकीय एवं निजी विद्यालय में से किसी को भी प्राप्त नहीं हुई।

उस पर भी सबसे बड़ी परेशानी थी कि निजी विद्यालयों को प्राप्त सभी पुस्तकों को डिपो में ही स्कैन करना था । जबकि शासकीय विद्यालय के लिए विद्यालय स्तर पर ही स्कैनिंग करने के लिए छूट प्रदान की गई थी। यह दोहरा मापदंड पहली बार छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के द्वारा अपनाया गया।

छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के मांग एवं दबाव पर डिपो में स्कैनिंग की व्यवस्था को हटाकर निजी विद्यालय को भी अपनीअपने स्कूल में ही स्कैनिंग करने का एहसान पत्र जारी किया गया।
इसके पूर्व में किसी भी वर्ष,किसी भी प्रकार की पुस्तकों में स्कैनिंग की व्यवस्था नहीं थी।

छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष एवं अधिकारियों के बीच की लाभ हानि की आपसी खींचतान के चलते आपस में दोष मढ़कर यह नया तुगलकी फरमान जारी किया गया था।

सभी शासकीय एवं निजी विद्यालय के शिक्षकों को 15 दिन से एक महीने तक विद्यालय में सब कार्यों को छोड़कर पुस्तकों का स्कैन करना पड़ा।

इस कार्य के पीछे यह कारण बताया गया कि पुस्तक शिक्षकों के द्वारा चोरी कर मार्केट में बेच दी जाती है।आज तक पाठ्य पुस्तक निगम एक भी ऐसा प्रकरण नहीं बता सका कि निजी अथवा शासकीय विद्यालयों द्वारा पुस्तकों को कबाड़ में बेचा गया ।

जिस शासन को निजी विद्यालयों को तो छोड़ दें बल्कि अपने ही शासकीय शिक्षकों पर भी पुस्तकों को बेचने की शंका या संशय हो ।तो सोचिए ,वह शिक्षक विद्यालय में अध्यापन का कार्य कैसे ईमानदारी से संपन्न कराता होगा।

सबसे मजेदार घटना की विगत वर्ष स्कैनिंग की जब पहली बार व्यवस्था की गई और जब पुस्तक शासकीय या निजी विद्यालय में कहीं नहीं पहुंची थी तब भी प्रारंभ में ही कबाड़ में पहुंच गई थी। इससे सिद्ध होता है कि निगम के माध्यम से ही पुस्तके कबाड में बेची जाती रही है मगर आज पर्यन्त इसकी जवाबदारी छत्तीसगढ़ पाठ पुस्तक निगम के अध्यक्ष या विभिन्न कर्मचारी अधिकारी में से किसी पर तय नहीं हुई न ही किसी पर कोई कार्यवाही हुई। पूरा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पाठ्य पुस्तक निगम के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।

विगत वर्ष 2025 26 में भी छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री महोदय एवं छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी से मुलाकात कर पुस्तक को शासकीय विद्यालय की तरह निजी विद्यालय को भी संकुल स्तर पर शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के पूर्व पुस्तक प्रदान करने के लिए ज्ञापन दिया गया था और हमें आश्वासन मिला था की आगामी सत्र से समय पर पुस्तक संकुल एवं स्कूल स्तर पर प्रदान की जाएगी।

परंतु विगत 2 ,3 माह पूर्व छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के द्वारा एक आदेश जारी कराया गया जिसमें बुक बैंक की योजना थी ।

पत्र में छत्तीसगढ़ पाठ पुस्तक निगम के हवाले से कहा गया कि पुस्तक पहुंचने में देरी हो जाती है इसलिए विद्यालय के पुराने पुस्तकों को विद्यार्थियों से एकत्र करना है।

अर्थात ये पत्र वर्तमान सत्र 2026-27 के लिए भी पुस्तक सही समय पर उपलब्ध नहीं कर पाने की दुर्व्यवस्था और कमजोरी को दर्शाती है।पूरा एक वर्ष का समय होने के बाद भी पाठ्य पुस्तक निगम क्यों समय पर पुस्तके नहीं छपवा पाती इस पर शासन को कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए

और विगत 15 दिनों पूर्व आदेश जारी हुआ कि शासकीय स्कूलों को तो संकुल एवं स्कूल स्तर पर पुस्तक प्रदान की जाएगी ।परंतु निजी विद्यालयों के लिए फिर से वही छत्तीसगढ़ के 6 डिपो में पुस्तक देने का आदेश जारी किया गया ।

16 जून से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होना है और आज दिनांक 11 जून तक निजी विद्यालयों को डिपो से पुस्तक प्रदान करने के लिए कोई भी तिथि जारी नहीं हुई है।

किसी भी डिपो में एक दिन में अधिकतम 40 से 50 स्कूल को ही पुस्तक प्रदान की जा सकती है ।उस स्थिति में छत्तीसगढ़ के सभी 6 डिपो से 8000 के आसपास निजी विद्यालयों को पुस्तक देने में करीब 3 महीने का समय लगेगा

और अभी वर्तमान समय में डीजल की आपूर्ति के संकट को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के द्वारा प्रधानमंत्री महोदय की इंधन बचत की मंशा को ध्यान में रखते हुए निशुल्क वितरित की जाने वाली पुस्तकों को निजी विद्यालय में भी संकुल स्तर पर प्रदान करने की व्यवस्था की मांग हमारे द्वारा माननीय मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री जी से भी मिलकर की गई है ।

छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ शासन से मांग करता है कि पुस्तक वितरण करने की व्यवस्था में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम अपने अंतरिक कलह एवं भ्रष्टाचार के चलते लगातार फेल हो रहा है ऐसे में उससे वितरण व्यवस्था की जिम्मेदारी वापस लेकर शिक्षा विभाग को सौंप दी जानी चाहिए तथा जिला शिक्षा अधिकारी/ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से पुस्तकें वितरण करवाई जाए।

या फिर एनसीईआरटी ने जिस प्रकार की वितरण व्यवस्था बनवाई है की खुले बाजार में पुस्तकें रखी जाती है और अत्यंत कम शुल्क में बच्चों को उपलब्ध हो जाती है वैसे ही छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की सभी पुस्तक भी खुले बाजार में दे दी जाए। जिससे पालक उसे स्वयं खरीद सके।सरकार चाहे तो DBT के माध्यम से पुस्तकों की राशि सीधे बच्चों के खाते में ट्रांसफर कर दे।
छत्तीसगढ़ के सफेद हाथी हो चुके पाठ्य पुस्तक निगम को भंग कर उसके स्थान पर एनसीईआरटी जैसी व्यवस्था बनाई जाए।
यदि स्कूलों को समय पर पुस्तके नहीं मिलेगी तो मजबूरी में संगठन को पुनः आंदोलन का रुख अपनाना पड़ेगा।
उक्त प्रेस विज्ञप्ति संस्था के प्रदेश अध्यक्ष सुबोध राठी एवं सचिव मनोज पाण्डेय ने जारी की साथ ही जिला के जिला अध्यक्ष अक्षय कुमार दुबे ने बताया की जिला में भी बार बार पूछने पर किसी प्रकार की सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है ।।

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