छोटी सी उम्र में संघर्ष का शुभारंभ और मां के सपनों का पीछा करते सात समुंदर पार पहुंच गई हुनरमंद बेटी इशिता की ख्याति


राष्ट्रीय बालिका दिवस आज : नन्हीं कथक गर्ल इशिता ने 12 नेशनल तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दो बार जीत चुकी है विजेता का खिताब, बन रही हम उम्र दोस्तों की प्रेरणा

होनहार बिटिया इशिता ने जब अपने संघर्ष का शुभारंभ किया, तब वह केवल साढ़े चार साल थी। कथक में अभ्यास का पहला वर्ष पूरा करते-करते उसने एक नेशनल जीत लिया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक-एक कर वह 12 बार राष्ट्रीय विजेता का पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है। अपनी मां के सपनों का पीछा करते इशिता की ख्याति सात समुंदर पार जा पहुंची। जनवरी-2024 में ही उसने मलेशिया की अंतर्राष्ट्रीय नृत्य कला स्पर्धा में दूसरी बार विश्व विजेता का खिताब अपने नाम किया है।

कोरबा(thevalleygraph.com)। इशिता शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सिंघिया में गणित के व्याख्याता रघुनंदन कश्यप व श्रीमती अनिता कश्यप की पुत्री है। मां अनिता ने बताया कि उन्होंने भी बचपन में कला से काफी लगाव था। वह भी क्लासिकल में कॅरियर बनाने की ख्वाहिश रखतीं थी। जब उनकी लाडली में कला के प्रति लगाव और प्रतिभा की अनुभूति हुई, तो बचपन के ख्वाब फिर से ताजा हो गए। अब उन्होंने अपने सपनों को इशिता के भीतर आकार लेता महसूस किया और अब उसके हुनर को उड़ान देने में जुट गई हैं। अपनी मां के सपनों को पूरा करने का जुनून इशिता में नजर आता है और इसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रही है। दो भाई-बहन में इशिता छोटी है और कॉलेज की पढ़ाई कर रहे उसके भैया तनुज ने भी तबला वादन में इसी साल विशारद (फाइनल ईयर) की परीक्षा दी है। 12 बार नेशनल में विनर बन चुकी इशिता ने बीते वर्ष आयोजित 10वीं कल्चरल ओलम्पियाड-2023 दुबई में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और उसके बाद इसी माह मलेशिया की स्पर्धा में कॅरियर में दूसरी बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विजेता का खिताब अपने नाम किया है।

केंद्रीय विद्यालय-2 एनटीपीसी में 5वीं की होनहार छात्रा
केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2 एनटीपीसी कोरबा के प्राचार्य एसके साहू ने कहा कि इशिता उनकी संस्था में कक्षा 5वीं की एक होनहार छात्रा है। दिन-रात कड़ी मेहनत कर एक मुकाम हासिल करने की ओर अग्रसर इशिता पढ़ाई में भी मेधावी है। प्रतिदिन कठिन रियाज और उसके बाद स्कूल में पढ़ाई की जिम्मेदारियों को जिस खूबसूरती से वह सफलतापूर्वक निभा रही है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले कल में वह किन बुलंदियों पर होगी। विद्यालय के संगीत शिक्षक अशोक देवांगन ने बताया कि विद्यालय की ओर से भी उसे प्रोत्साहित किया जा रहा है, पर उनकी लगन और मेहनत का कोई जवाब नहीं। मां अनिता ने बताया कि कथक के साथ-साथ वह अपनी पढ़ाई-लिखाई में भी उतने ही समर्पण से तैयारी कर रही है। हर परीक्षा में उसने एप्लस ग्रेड ही हासिल किया और जब कभी कला स्पर्धाओं के बीच कमी रह जाती, वापस आकर उसे पूरा करने भी जुट जाती है। उसकी इस अद्भुत क्षमता का विद्यालय परिवार चकित और गौरवान्वित है।

कथक शुरू कर चुकी हैं प्रतिभा से प्रेरित 13 बालिकाएं
इशिता सुर ताल संगीत कला केंद्र बालको में अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध कलागुरू पं. मोरध्वज वैष्णव (तालमणी) से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। उन्होंने अपनी इस प्रतिभावान शिष्या के लिए कहा कि उसकी क्षमताएं अद्भुत हैं। जिस समर्पण से ईश्वर ने उसे कला प्रतिभा से नवाजा है, उतने ही समर्पण से वह भी अपने हुनर को निखारने व संवारने कड़ी मेहनत कर रही है। उसने कोरबा से लेकर बिलासपुर, रायपुर, भिलाई, कोलकाता व आगरा समेत देश के अनेक राज्यों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। माता-पिता का सतत प्रोत्साहन और अपने गुरूजी पंडित वैष्णव के अनुभव का लाभ निश्चित तौर पर उसे उसकी मंजिलों पर पहुंचाएगा। इशिता की प्रतिभा को पुरस्कारों की ऐसी झड़ी लगी कि उससे प्रेरित होकर उसके घर के पास रहने वाली 13 बालिकाओं ने भी कथक सीखना शुरू कर दिया है।


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